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गरियाबंद जिले के कलेक्टर बी.एस. उइके और एसपी नीरज चंद्राकर एवं जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने पेश की मानवता की मिसाल,



गरियाबंद जिले के कलेक्टर बी.एस. उइके और एसपी नीरज चंद्राकर एवं जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने पेश की मानवता की मिसाल, सड़क दुर्घटना में दो घायल व्यक्ति को अपने वाहन से  गरियाबंद अस्पताल खुद साथ में लेकर आए।


विवरण- गरियाबंद जिले के कलेक्टर श्री बी.एस. उईके और पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चंद्राकर, जिला पंचायत सी.ई.ओ. श्री प्रखर चन्द्रकार आज मानवता की एक अनूठी मिसाल पेश की है। एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल दो व्यक्तियों को देखकर तीनों अधिकारियों ने संवेदनशीलता दिखाई और बिना समय गंवाए उसे अपने शासकीय वाहन से तत्काल जिला अस्पताल गरियाबंद खुद साथ लेकर आए । घटना का विवरण कलेक्टर, एसपी एवं सीईओ थाना छुरा स्थित ग्राम कंसिघी से सुशासन तिहार लौट रहे थे। उसी दौरान छुरा रोड कचना धुरवा के पास से गुजर रहे थे। उसी दौरान रास्ते में गंभीर सड़क दुर्घटना हुई थी। जिसमें दो राहगीर लहूलुहान हालत में सड़क पर पड़े तड़प रहे थे। दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए वहां आम लोगों की भीड़ जुटी थी, लेकिन पीड़ित को तुरंत चिकित्सा सहायता नहीं मिल पा रही थी। कलेक्टर बीएस उईके और एसपी नीरज चंद्राकर ने जैसे ही घायल व्यक्ति को देखा, उन्होंने तुरंत अपना काफिला रुकवाया। तीनों वरिष्ठ अधिकारी खुद वाहन से नीचे उतरे और घायल की स्थिति का जायजा लिया। एम्बुलेंस का इंतजार करने में समय व्यर्थ न करते हुए, उन्होंने बिना किसी प्रोटोकाॅल की परवाह किए दोनो घायल व्यक्ति को अपने ही शासकीय वाहन में बिठाया। घायल को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल पहुंचने पर उन्होंने डाॅक्टरों की टीम को निर्देशित किया कि पीड़ित को अविलंब और बेहतर से बेहतर इलाज मुहैया कराया जाए। 

               डाॅक्टरों के अनुसार, समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण घायल व्यक्ति की स्थिति अब नियंत्रण में है। दोनो घायल व्यक्तियों का ईलाज जारी है। 

कलेक्टर और एसपी ने आम जनता से भी अपील की है। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में शुरुआती गोल्डन आवर (पहला घंटा) बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि कोई भी व्यक्ति सड़क पर घायल अवस्था में दिखे, कानूनी कार्यवाही से डरे बिना उसकी मदद करें और उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाएं। आपका एक छोटा सा प्रयास किसी की जान बचा सकता है। शासन की राह वीर योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने पर शासन की ओर से (गुड सेमेरिटन) को 25 हजार रूपये प्रोत्साहन राशि प्रदाय किया जाता है।

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