राज्यपाल गोदग्राम बिजली पंचायत का होगा सर्वांगीण विकास किया जाएगा - राज्यपाल के सचिव श्री प्रसन्ना
बिजली पंचायत के सतत् विकास के लिए राज्यपाल के सचिव श्री सी आर प्रसन्ना, कलेक्टर श्री बीएस उइके, जिला पंचायत के सीईओ श्री प्रखर चंद्राकर ने ग्रामीणों से की चर्चा
गरियाबंद 14 जनवरी 2026/ राज्यपाल श्री रमेन डेका द्वारा गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर विकासखण्ड को 05 जून 2025 को ग्राम पंचायत बिजली एवं आश्रित गांव मड़वाडीह को गोद लिया गया है। इस ग्राम पंचायत का सतत चहुंमुखी विकास किया जा रहा है। इस संबंध में राज्यपाल के सचिव एवं सहकारिता सचिव श्री सी. आर. प्रसन्ना ने औचक निरीक्षण कियां। इस दौरान कलेक्टर श्री बीएस उइके, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रखर चंद्राकर सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी एवं ग्रामीण जन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
उन्होंने ग्राम पंचायत बिजली को राज्यपाल द्वारा गोद लिये जाने की अवधारणा को ग्रामीणों एवं बिहान दीदीयों के बीच विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस ग्राम पंचायत का चरणबद्ध तरीके से विकास कार्य कराया जाएगा। इसके लिए शासन प्रशासन, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों का सहयोग एवं समन्वय बेहद जरूरी है।
श्री प्रसन्ना ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा आजीविका के स्थायी साधन विकसित करने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत बिजली में आजीविका संवर्धन हेतु एक विस्तृत एवं बहुआयामी कार्ययोजना तैयार की गई है। इस कार्ययोजना का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्र की पात्र महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और “लखपति दीदी” की श्रेणी तक पहुँचाना है।
उन्होंने ग्रामीण एवं बिहान दीदीयों से चर्चा करते हुए कहा कि कार्ययोजना के तहत अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा सर्वप्रथम ग्राम पंचायत की उन पात्र महिलाओं को चिन्हांकित किया गया है जो अब तक किसी भी स्व-सहायता समूह से नहीं जुड़ पाई थीं। इन महिलाओं को समूहों से जोड़कर सामूहिक बचत, ऋण एवं आजीविका गतिविधियों में भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही ग्राम पंचायत के समस्त स्व-सहायता समूहों को बैंक लिंकेज से जोड़ा जा रहा है, ताकि महिलाओं को वित्तीय संसाधनों तक सहज पहुँच मिल सके। अधिक से अधिक महिलाओं को उद्यमी के रूप में विकसित करने तथा उन्हें इंटरप्राइज फाइनेंस से जोड़ने की भी योजना बनाई गई है। ग्राम पंचायत में मॉडल सीएलएफ (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) का चयन किया जा चुका है, जो समूहों के मार्गदर्शन, निगरानी एवं समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके अतिरिक्त जेंडर रिसोर्स सेंटर के माध्यम से सामाजिक एवं लैंगिक सहायता व्यवस्था को मजबूत करने हेतु भी कार्ययोजना बनाई गई है, जिससे महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा और परामर्श जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकें। कृषि एवं गैर-कृषि आधारित आजीविका गतिविधियों के लिए स्व-सहायता समूहों की दीदियों का चिन्हांकन किया गया है। इन गतिविधियों के माध्यम से महिलाओं की आय बढ़ाकर उन्हें लखपति दीदी की श्रेणी में लाने का लक्ष्य रखा गया है। चिन्हांकित स्व-सहायता समूहों का सहकारिता विभाग में पंजीयन भी कराया जाएगा।
ग्राम पंचायत स्तर पर ऑफलाइन मेसन प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा, वहीं महिलाओं की रुचि के अनुसार प्रदाय संस्थाओं के माध्यम से जैविक खेती का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। पशुपालन विभाग एवं कृषि विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर बकरीपालन, पशुपालन और सब्जी बाड़ी जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा उत्पादक समूह का गठन कर उन्हें एफपीओ से जोड़ते हुए आजीविका गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। भविष्य में ग्राम पंचायत में बायो रिसोर्स सेंटर विकसित करने की भी योजना है, जिससे स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकें। इसके अलावा उन्होंने ग्रामीणों को रबी सीजन में धान के विकल्प के रूप में चना, मसूर, सरसों, मूंग, सब्जी एवं नकदी फसल लगाने के लिए प्रेरित किया। जिससे कि किसानों की आय में और अधिक वृद्धि हो सके। बिहान दीदीयों ने बताया कि यहाँ 29 महिला स्व-सहायता समूह है, जिसमें 316 महिलाएं बिहान योजना से जुड़ी हुई है। उनके द्वारा विभिन्न प्रकार के आजीविका से संबंधित कार्य किए जा रहे है।

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