नक्सलवाद के अंत की आहट: खूंखार लीडर पापाराव करेगा सरेंडर, बस्तर में ढहेगा लाल आतंक का किला
March 24, 2026
नक्सलवाद के अंत की आहट: खूंखार लीडर पापाराव करेगा सरेंडर, बस्तर में ढहेगा लाल आतंक का किला
कांकेर। बस्तर के जंगलों से नक्सलवाद के पूरी तरह खात्मे के लिए तय की गई डेडलाइन में अब महज एक हफ्ता बचा है। इस बीच सुरक्षाबलों के हाथ एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। खबर है कि नक्सलियों का सबसे प्रमुख और खूंखार लीडर पापाराव आज अपनी पूरी टीम के साथ बस्तर आईजी के सामने आत्मसमर्पण कर सकता है।
खत्म होगी नक्सलियों की लीडरशिप
पापाराव के सरेंडर को बस्तर में नक्सलवाद की 'अंतिम कील' के रूप में देखा जा रहा है। वर्तमान में नक्सलियों के लगभग सभी शीर्ष नेता या तो मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं या मुख्यधारा में लौट आए हैं। ऐसे में पापाराव ही एकमात्र बड़ा चेहरा बचा था। उसके आत्मसमर्पण के साथ ही संगठन की लीडरशिप पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी, जिससे शेष बचे कैडर्स के हौसले पस्त होना तय है।
कांकेर में सस्पेंस बरकरार: 18-20
नक्सलियों पर टिकी नजरें
एक तरफ जहाँ पापाराव के सरेंडर की सुखद खबर है, वहीं उत्तर बस्तर (कांकेर) के जंगलों में अब भी सस्पेंस की स्थिति बनी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक:
शेष नक्सली: उत्तर बस्तर में अभी भी 18 से 20 नक्सली सक्रिय हैं।
प्रमुख नाम: इनमें डीवीसीएम (DVCM) चंदर कत्लाम और एसीएम (ACM) रूपी जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
हालात: क्षेत्र में उनके सरेंडर की अफवाहें तो रोज उड़ रही हैं, लेकिन धरातल पर अब तक कोई हलचल नहीं दिखी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पापाराव के सरेंडर के बाद इन बचे हुए नक्सलियों के पास कोई विकल्प नहीं बचेगा। आने वाले 2 से 3 दिन बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।
अंतिम प्रहार की तैयारी
नक्सलवाद मुक्ति की समय सीमा (डेडलाइन) करीब आते देख पुलिस प्रशासन और सुरक्षाबल पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। पापाराव का आत्मसमर्पण न केवल एक जीत है, बल्कि यह शेष नक्सलियों के लिए एक कड़ा संदेश भी है। अब देखना यह होगा कि क्या चंदर कत्लाम और रूपी जैसे लीडर समय रहते हथियार डालते हैं या सुरक्षाबलों के कड़े एक्शन का सामना करते हैं।

