तालाब की मेड़ पर 5 लाख का ‘डिजिटल सेंटर’!
September 01, 2026
तालाब की मेड़ पर 5 लाख का ‘डिजिटल सेंटर’!
गांव से दूर सुविधा केंद्र बनाने की जिद क्यों? सरकारी जमीन होते हुए तालाब की मेड़ ही क्यों चुनी गई जमीन?
गरियाबंद।सरकारी योजनाओं का उद्देश्य आम लोगों को सुविधा देना होता है,लेकिन ग्राम पंचायत आमदी म में खनिज न्यास निधि से करीब पांच लाख रुपये की लागत से बन रहा अटल डिजिटल सुविधा केंद्र अब सुविधा से ज्यादा सवालों का केंद्र बन गया है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस केंद्र को ग्रामीणों की डिजिटल जरूरतें पूरी करने के लिए बनाया जा रहा है,उसे गांव की मुख्य आबादी से दूर तालाब की मेड़ पर ही क्यों बनाया जा रहा है?
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के लिए गांव में उपयुक्त सरकारी जमीन उपलब्ध होने के बावजूद ऐसी जगह का चयन किया गया है,जहां पहुंचना ग्रामीणों के लिए मुश्किल होगा।ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यह केंद्र आखिर ग्रामीणों की सुविधा के लिए बनाया जा रहा है या सिर्फ सरकारी राशि खर्च करने के लिए?
ग्रामीणों से दूर केंद्र,सुविधा किसे मिलेगी?,,,,,अटल डिजिटल सुविधा केंद्र के जरिए ग्रामीणों को विभिन्न डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है। लेकिन आमदी के ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र गांव की मुख्य आबादी से काफी दूर बनाया जा रहा है।सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों,महिलाओं और जरूरतमंद ग्रामीणों को होगी। जिन्हें छोटी-छोटी डिजिटल सेवाओं के लिए बार-बार केंद्र तक आना-जाना पड़ेगा।वही ग्रामीणों की मांग है कि
जब सुविधा ग्रामीणों को देनी है तो केंद्र गांव के बीच क्यों नहीं?क्या स्थल चयन से पहले ग्रामीणों की सुविधा का सर्वे किया गया था?क्या ग्राम पंचायत ने वैकल्पिक सरकारी जमीन तलाशने की कोशिश की थी?
बताया जा रहा है कि भवन का निर्माण तालाब की मेड़ पर कराया जा रहा है।ऐसे में तालाब की संरचना,मेड़ की मजबूती और भविष्य में जलभराव के दौरान भवन की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।एक तरफ शासन-प्रशासन तालाबों के संरक्षण,सौंदर्यीकरण और अतिक्रमण रोकने की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी राशि से तालाब की मेड़ पर ही निर्माण कराया जाना ग्रामीणों को समझ से परे है।
क्या निर्माण से पहले तालाब की भूमि और मेड़ की तकनीकी जांच हुई?
क्या भवन निर्माण के लिए संबंधित विभागों से अनुमति ली गई?
क्या स्थल का तकनीकी परीक्षण कराया गया?
यदि नहीं,तो पांच लाख रुपये के निर्माण की स्वीकृति किस आधार पर दी गई?इन सवालों का जवाब जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए।
गांव में सरकारी जमीन पर कब्जे,फिर निर्माण के लिए मेड़ क्यों?
ग्रामीणों का कहना है कि आमदी में सरकारी जमीनों पर कब्जे की शिकायतें हैं और कई जमीनों के उपयोग को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में प्रशासन यदि सरकारी जमीन का चिन्हांकन करे तो ग्रामीणों के अनुसार गांव में ही सुविधा केंद्र के लिए उपयुक्त जगह मिल सकती है।फिर सवाल यह है कि जब गांव में सरकारी जमीन का विकल्प मौजूद हो सकता है,तो तालाब की मेड़ को ही निर्माण स्थल क्यों बनाया गया?
क्या जमीन चयन की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ?क्या ग्राम सभा में स्थल चयन पर चर्चा हुई?
क्या ग्रामीणों की राय ली गई?इन सवालों की जांच जरूरी है।
ज्ञात हो कि खनिज न्यास निधि आमतौर पर क्षेत्र के विकास और लोगों की सुविधा के लिए खर्च की जाती है। ऐसे में इस राशि से बनने वाले भवन का उपयोग अधिकतम ग्रामीणों को मिलना चाहिए।
लेकिन यदि भवन ऐसी जगह बन रहा है जहां ग्रामीणों की पहुंच ही मुश्किल हो, तो सरकारी राशि खर्च करने की उपयोगिता पर सवाल उठना तय है।
ग्रामीणों की मांग है कि निर्माण कार्य की स्वीकृति, स्थल चयन,तकनीकी स्वीकृति,भूमि संबंधी दस्तावेज,निर्माण एजेंसी,लागत और भुगतान की स्थिति की जांच सार्वजनिक की जाए।
गौरतलब है जांच हुई तो खुल सकता है ‘स्थान चयन’ का राज।मामला सिर्फ भवन निर्माण का नहीं, बल्कि सरकारी योजना की उपयोगिता और सरकारी भूमि के इस्तेमाल से जुड़ा है। इसलिए ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर यह स्पष्ट करे कि तालाब की मेड़ पर निर्माण नियमों के अनुरूप है या नहीं।साथ ही निर्माण स्थल की भूमि का रिकॉर्ड, तकनीकी स्वीकृति और स्थल चयन की प्रक्रिया की जांच की जाए।
सरकार ग्रामीणों को डिजिटल सुविधा देना चाहती है, लेकिन सुविधा केंद्र ही ग्रामीणों से दूर क्यों?
गांव में जमीन की तलाश करने के बजाय तालाब की मेड़ क्यों?
क्या पांच लाख रुपये खर्च होने से पहले इन सवालों का जवाब किसी ने तलाशा? यदि निर्माण नियमों के अनुरूप है तो जिम्मेदार अधिकारी दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करें,और यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो सरकारी राशि खर्च होने से पहले निर्माण स्थल को लेकर उचित निर्णय लिया जाना चाहिए।
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