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कार्यशाला में पुलिस टीम के साथ बैंक के अधिकारी भी मौजूद रहे

 छत्तीसगढ़ के साइबर जागृति अभियान अंतर्गत आज गरियाबंद पुलिस द्वारा जिले के सभी पेंशनदरानो का साइबर अपराध के संबंध में बचाव एवं सुझाव के संबंध में कार्यक्रम आयोजित कर सभी को जागरूक किया गया।*


🚨 *कार्यक्रम में उपस्थि पेंशनधारियों को लघुफिल्म एवं पीपीटी के माध्यम से जागरूक किया गया।*


🚨* *कार्यक्रम उपस्थित लोंगों के द्वारा उनके साथ हुए ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के संबंध में आपबीती सुनाई।*


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कार्यशाला में पुलिस टीम के साथ बैंक के अधिकारी भी मौजूद रहे।* 


गरियाबंद-  छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा पुरे प्रदेश भर में चलाए जा रहे *साइबर जागृति अभियान* के अंतर्गत आज गरियाबंद पुलिस द्वारा एक विशेष और अत्यंत महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पुलिस अधीक्षक गरियाबंद वेदव्रत सिरमौर के मार्गदर्शन में अति. पुलिस अधीक्षक कर्ण कुमार उइके, अनुविभागीय अधिकारी गरियाबंद निषा सिन्हा के साथ बैंक के अधिकारी के द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिकों एवं पेंशनभोगियों (पेंशनरदानों) को आमंत्रित कर उन्हें मौजूदा दौर में बढ़ रहे साइबर अपराधों, वित्तीय धोखाधड़ी और उनसे बचाव के तरीकों के संबंध में विस्तार से जागरूक किया गया। 

         *वरिष्ठ नागरिक साइबर ठगों के आसान टारगेट* - कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों के द्वारा अपना संदेश साझा करते हुए कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारी और वरिष्ठ नागरिक अपनी जीवनभर की जमा पूंजी (पेंशन व फंड) के कारण अक्सर साइबर अपराधियों के निशाने पर रहते हैं। डिजिटल अरेस्ट, फर्जी बैंक अधिकारी बनकर काॅल करना, और जीवन प्रमाण पत्र अपडेट करने के नाम पर ठगी करना आजकल आम हो गया है। वरिष्ठ नागरिकों को तकनीक की कम जानकारी होने का फायदा उठाकर ठग उन्हें अपना शिकार बनाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए गरियाबंद पुलिस ने विशेष रूप से पेंशनर्स के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया है ताकि उनकी कमाई सुरक्षित रह सके। 

         *कार्यशाला में दिए गए मुख्य सुरक्षा सुझाव एवं बचाव के उपाय* - कार्यक्रम के दौरान साइबर सेल की विशेषज्ञ टीम द्वारा उपस्थित सभी पेंशनभोगियों को प्रोजेक्टर में लघुफिल्म और वास्तविक उदाहरणों (केस स्टडीज) के माध्यम से निम्नलिखित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। गोपनीय जानकारी व किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता नंबर, एटीएम पिन (यूपीआई पिन (या मोबाइल पर आया ओटीपी (साझा न करें। बैंक कभी भी फोन पर ऐसी जानकारियां नहीं मांगता। डिजिटल अरेस्ट के झांसे में न आएं पुलिस, सीबीआई, या ई.डी. (के नाम पर डराकर वीडियो काॅल पर बंधक बनाने (डिजिटल अरेस्ट) जैसी स्थिति होने पर तुरंत घबराएं नहीं। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर गिरफ्तारी या पैसे की मांग नहीं करती। अनजान लिंक्स जैसे व्हाट्सएप या एसएमएस पर आने वाले किसी भी संदिग्ध या लाॅटरी वाले लिंक पर क्लिक न करें। किसी के कहने पर मोबाइल में कोई अनजान ऐप डाउनलोड न करें। पेंशन लाइफ सर्टिफिकेट, पेंशन शुरू रखने या अपडेट करने के नाम पर आने वाले फर्जी काॅल पर विश्वास न करें। हमेशा संबंधित बैंक शाखा या ट्रेजरी कार्यालय में जाकर ही संपर्क करें। ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत दृ 1930 हेल्प लाइन पर इसकी सूचना अवष्य दे।

        अति0 पुलिस अधीक्षक ने सभी वरिष्ठ नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी कारणवश वे किसी साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो बिना डरे या शरमाए तुरंत गोल्डन समय (शुरुआती 1-2 घंटे) के भीतर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर काॅल कर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। इसके साथ ही नजदीकी थाने या साइबर सेल में भी संपर्क करें। त्वरित सूचना देने से ठगी गई राशि को अपराधियों के खाते में होल्ड कराया जा सकता है। 

          कार्यक्रम के अंत में गरियाबंद पुलिस द्वारा उपस्थित सभी पेंशनर्स को साइबर जागरूकता के साथ सेल्फी फेम में फोटो खिचा कर अपने सोशल मीडया में पोस्ट करने की अपील की गई। वरिष्ठ नागरिकों ने पुलिस की इस संवेदनशील पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को जारी रखने का आग्रह किया।

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