छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से सामने आई है एक ऐसी तस्वीर, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
ऋषि पंचमी के अवसर पर गरियाबंद के राजिम इलाके के ग्राम देवरी में वर्षों पुरानी एक अनोखी परंपरा निभाई गई।
यहां सांवरा समाज के लोगों ने विधि-विधान के साथ सर्प पूजा की और पूजा-अर्चना के बाद सांपों को शोभायात्रा में शामिल किया गया।
ढोल-नगाड़ों की गूंज...
पारंपरिक वेशभूषा...
और बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीणों के बीच जब सर्पों के साथ शोभायात्रा गांव की गलियों से निकली, तो इस अनोखे आयोजन को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
शोभायात्रा के दौरान सड़क के दोनों ओर ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे लोग नजर आए।
लोग इस परंपरा को करीब से देखने के लिए काफी उत्सुक दिखाई दिए।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऋषि पंचमी के दिन सर्प पूजा और सर्प शोभायात्रा की यह परंपरा क्यों निभाई जाती है?
दरअसल, ग्राम देवरी में सर्प पूजा की परंपरा वर्षों से चली आ रही है।
सांवरा समाज के लोगों के लिए सर्पों का धार्मिक और पारंपरिक रूप से विशेष महत्व माना जाता है।
ऋषि पंचमी के दिन समाज के लोग धार्मिक विधि-विधान के साथ सर्पों की पूजा करते हैं।
इसके बाद पूजा में शामिल किए गए सर्पों को लेकर पूरे गांव में शोभायात्रा निकाली जाती है।
इस दौरान ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वेशभूषा के बीच पूरा माहौल धार्मिक और उत्सवमय नजर आता है।
हर साल इस आयोजन में समाज के लोगों के साथ आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
यही वजह है कि देवरी गांव की यह परंपरा अब स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बन चुकी है।
लेकिन इस आयोजन की खास बात सिर्फ सर्प पूजा और शोभायात्रा तक सीमित नहीं है।
आयोजन के दौरान ग्रामीणों को सर्पदंश से बचाव और उससे जुड़ी जरूरी जानकारी भी दी जाती है।
गांव में स्थित गुरु सांवरा पाठशाला में पूरे वर्ष सर्पदंश से बचाव और उपचार से जुड़ी जानकारी देने का काम किया जाता है।
ग्रामीणों को यह बताया जाता है कि सर्पदंश की स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल जरूरी चिकित्सा सहायता लेना कितना महत्वपूर्ण है।
ऋषि पंचमी के अवसर पर इसी प्रशिक्षण से जुड़े दीक्षांत समारोह का आयोजन भी किया जाता है।
इसका उद्देश्य ग्रामीणों में सर्पदंश को लेकर जागरूकता बढ़ाना और आपात स्थिति में सही कदम उठाने की जानकारी देना है।
यानी एक तरफ जहां यह आयोजन धार्मिक आस्था और वर्षों पुरानी लोक परंपरा से जुड़ा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ सर्पदंश से बचाव और जागरूकता का संदेश भी देता है।
आयोजन पूरा होने के बाद सर्पों को जंगल में छोड़ने की परंपरा भी निभाई जाती है।
यानी पूजा और शोभायात्रा के बाद उन्हें उनके प्राकृतिक वातावरण में वापस पहुंचाया जाता है।
ग्राम देवरी में हर साल होने वाला यह आयोजन धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति, जागरूकता और सर्प संरक्षण से जुड़ा एक अलग रूप सामने रखता है।
ऋषि पंचमी के मौके पर निकली इस अनोखी सर्प शोभायात्रा की तस्वीरें और वीडियो भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच सांपों के साथ निकली यह शोभायात्रा देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
गरियाबंद के देवरी गांव की यह परंपरा बताती है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में आज भी ऐसी कई लोक परंपराएं मौजूद हैं, जिनका संबंध धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और प्रकृति से भी जुड़ा हुआ है।
फिलहाल, गरियाबंद के देवरी गांव में ऋषि पंचमी पर निभाई गई यह अनोखी सर्प पूजा और शोभायात्रा लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
देखिए गरियाबंद से KPS News की खास रिपोर्ट।

