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जिला एवं अपर सत्र न्यायालय गरियाबंद में नेशनल लोक अदालत का हुआ सफल आयोजन, कुल 68 हजार 744 प्रकरणों का हुआ निपटारा

गरियाबंद 13 सितम्बर 2025/ राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं छ.ग. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के आदेशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर के अध्यक्ष तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रायपुर श्री बलराम प्रसाद वर्मा के निर्देशानुसार जिला एवं अपर सत्र न्यायालय गरियाबंद में संचालित सिविल न्यायालयों, राजस्व जिला गरियाबंद के राजस्व न्यायालयों एवं राजिम और देवभोग के न्यायालयों में आज नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। उक्त लोक अदालत हेतु तालुका विधिक सेवा समिति गरियाबंद द्वारा 02 खण्डपीठों का गठन किया गया था। तालुका विधिक सेवा समिति गरियाबंद के अध्यक्ष श्री यशवंत वासनीकर ने बताया कि उक्त लोक अदालत हेतु जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश गरियाबंद श्री बी आर साहू की गठित खण्डपीठ में कुल 61 लंबित एवं 995 प्रिलिटिगेशन प्रकरण कुल 1056 प्रकरण राजीनामा हेतु रखे गये थे, जिनमें 16 लंबित मामलों का निराकरण करते हुए 70 लाख रूपये का एवार्ड पारित किया गया। वही 78 प्रिलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण करते हुए 7 लाख 64 हजार 2  रूपये का एवार्ड पारित किया गया। इस प्रकार उक्त खण्डपीठ में कुल 94 प्रकरणों का निराकरण करते हुए कुल 77 लाख 64 हजार 2 रूपये का एवार्ड पारित किया गया।

वहीं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं व्यवहार न्यायधीश वरिष्ठ श्रेणी गरियाबंद कु० सीमा कंवर की गठित खण्डपीठ में 806 प्रिलिटीगेशन प्रकरण रखे गये थे, तथा लंबित  समरी मामले सहित कुल 147 लंबित प्रकरण रखे गये थे। जिनमें से 12 प्री-लिटिगेशन प्रकरण एवं 131 लंबित  समरी मामलों का निराकरण करते हुए कुल 143 प्रकरणों का निराकरण करते हुए कुल 5 लाख 46 हजार 750 रूपये की राशि अदा करायी गयी। श्रीमती कांची अग्रवाल न्यायिक मजिस्ट्रेट वरिष्ठ श्रेणी देवभोग की खण्डपीठ में लंबित  समरी मामले सहित कुल 408 प्रकरण रखे गये थे जिनमें से सभी 408 लंबित मामलों का निराकरण करते हुए कुल 4 लाख 81 हजार 900 रूपये की राशि अदा करायी गयी। इसी प्रकार श्री सचिन पॉल टोप्पो न्यायिक मजिस्ट्रेट वरिष्ठ श्रेणी एवं व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी राजिम की गठित खण्डपीठ में 1477 प्रिलिटीगेशन प्रकरण रखे गये थे तथा समरी मामले सहित कुल लंबित 995 प्रकरण रखे गये थे जिनमें से 102 प्री-लिटिगेशन प्रकरण एवं 486 लंबित समरी मामलों का निराकरण करते हुए कुल 588 प्रकरणों का निराकरण करते हुए कुल 10 लाख 24 हजार 275 रूपये की राशि अदा करायी गयी। इसके साथ ही राजस्व न्यायालयों में कुल 67,511 प्रकरणों का निराकरण किया गया है।


इस प्रकार आज आयोजित नेशनल लोक अदालत में कुल 68 हजार 744 प्रकरणों का निराकरण कर  98 लाख 16 हजार 927 रूपये का अवॉर्ड पारित किया गया।

        तालुका अध्यक्ष श्री यशवंत वासनीकर ने यह भी बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर के अध्यक्ष श्री बलराम प्रसाद वर्मा एवं सचिव श्री अविनाश दुबे  के द्वारा समय-समय पर दिये गये निर्देशानुसार अन्य विभागों के अधिकारियों द्वारा नेशनल लोक अदालत के अवसर पर जिला एवं अपर सत्र न्यायालय गरियाबंद के परिसर में विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाये गये। उद्यानिकी विभाग द्वारा विभिन्न प्रकार के फलदार एवं फुलदार पौधों एवं वृक्षों का वितरण किया गया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोक अदालत में आये गये पक्षकारों, अधिवक्ताओं, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं जन सामान्य का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। उक्त नेशनल लोक अदालत के शुभारंभ के दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में कलेक्टर श्री भगवान सिंह उइके, श्री प्रकाश सिंह राजपूत, अपर कलेक्टर गरियाबंद, श्री चितेश देवांगन, तहसीलदार  गरियाबंद एवं अन्य राजस्व के अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

        तालुका अध्यक्ष अपर सत्र न्यायाधीश, एफटीएससी गरियाबंद श्री यशवंत वासनीकर, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश गरियाबंद श्री बीआर साहू एवं कु० सीमा कंवर, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गरियाबंद सहित श्री भगवान सिंह उइके, कलेक्टर  गरियाबंद, श्री प्रकाश सिंह राजपूत, अपर कलेक्टर गरियाबंद, श्री चितेश देवांगन, तहसीलदार गरियाबंद द्वारा न्यायालय परिसर गरियाबंद में उक्त नेशनल लोक अदालत के अवसर पर लगे विभिन्न विभागों, बैंको, विद्युत विभाग व नगरपालिक के इंस्टालों का निरीक्षण किया गया। उक्त विभागों के प्रमुख अधिकारियों एवं बैंकों के प्रबधंकों को उक्त लोक अदालत में पक्षकारों को अधिक से अधिक प्रकरणों के राजीनामा के माध्यम से निपटारा करने हेतु प्रेरित करने हेतु निर्देशित किया गया। राजस्व न्यायालयों में गठित खण्डपीठों के पीठासीन अधिका द्वारा लोक अदालत के पूर्व से ही संबंधित पक्षकारों एवं अधिवक्ताओं से प्री-सिटिंग कर इस लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण हेतु काफी प्रयास किये गये। इस लोक अदालत को सफल बनाने में खण्डपीठों के पीठासीन अधिकारीगण, राजस्व अधिकारियों, अधिवक्ता सदस्यगण और प्रकरणों से संबंधित अधिवक्तागण, न्यायालयीन कर्मचारियों तथा प्रीलिटिगेशन प्रस्तुत करने वाले अन्य विभाग के अधिकारियों तथा कर्मचारियों एवं संबंधित पक्षकारों का सराहनीय योगदान रहा।

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