Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS

रागी की खेती से किसान रोम नाथ साहू को मिला दोगुना मुनाफा

 सफलता की कहानी


रागी की खेती से किसान रोम नाथ साहू को मिला दोगुना मुनाफा

गरियाबंद, 10 अप्रैल 2026/ फिंगेश्वर विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पतोरा के किसान रोम नाथ साहू को धान की अपेक्षा दोगुना मुनाफा रागी को कम समय में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल माना जाता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। साथ ही अमीनो एसिड, कैल्शियम और पोटेशियम भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। कम हीमोग्लोबिन वाले व्यक्तियों के लिए रागी का सेवन बेहद फायदेमंद है। खेती-किसानी में मुनाफे वाली फसलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य शासन एवं केंद्र शासन द्वारा लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन्हीं में से लघु धान्य फसल रागी एक ऐसी फसल है, जिसका हजारों साल पुराना इतिहास है। माना जाता है कि इसकी खेती भारत में लगभग 4 हजार साल पहले शुरू हुई थी, जबकि इसकी बुवाई सबसे पहले अफ्रीका में की गई थी।
हमारे पूर्वज इसकी खेती करते थे, लेकिन बीच में कृषकों का रुझान धान और गेहूं की फसलों की ओर बढ़ गया, जिससे लघु धान्य फसल रागी खेतों और भोजन की थाली से लगभग गायब हो गई। परंतु अब शासन के लगातार प्रचार-प्रसार के कारण कृषकों ने अपने खेतों में रागी को पुनः स्थान देना शुरू कर दिया है।
ग्राम पतोरा, विकासखंड फिंगेश्वर, जिला गरियाबंद के कृषक रोम नाथ साहू ने बताया कि इस वर्ष उन्होंने 8 एकड़ में रागी की फसल की खेती की है। सामान्यतः रागी की खेती भर्री-टिकरा या उच्च भूमि में की जाती है, लेकिन रोम नाथ साहू ने धान वाले खेत में इसकी खेती कर एक नया प्रयोग किया है। उनकी रागी फसल की बढ़वार काफी अच्छी है। वर्तमान में बालियां निकल रही हैं, जिससे अच्छी उपज के आसार स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। रागी की खेती काफी सरल है। इसमें कीट एवं रोगों का प्रकोप बहुत कम होता है, जिसके कारण इसकी खेती में लागत भी कम आती है। उन्होंने अपनी फसल का पंजीयन बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत बीज निगम, जिला गरियाबंद में कराया है, जहां प्राप्त उत्पादन की खरीदी की जाएगी।
इस वर्ष कृषकों को रागी की बीज किस्म वी.एल. मंडुआ-376 राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई है। यह किस्म अगेती पैदावार के लिए विकसित की गई है और बीज रोपाई के 95 से 100 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसके पौधे मध्यम ऊंचाई के होते हैं और दाने हल्के भूरे रंग के होते हैं। इस किस्म का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 25 से 30 क्विंटल तक पाया जाता है।
रागी की फसल ग्रीष्मकालीन धान की एक बेहतर वैकल्पिक फसल के रूप में उभर रही है, जो किसानों को धान की अपेक्षा अधिक आमदनी देने में सक्षम है। के.आर. वर्मा, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, विकासखंड फिंगेश्वर ने बताया कि कृषकों को रागी का बीज एवं आदान सामग्री के रूप में सुपर कम्पोस्ट, निंदानाशक और जैविक कीटनाशक कार्यालय से प्रदाय किए गए हैं। साथ ही समय-समय पर कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा समसामयिक सलाह और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। उप संचालक कृषि, जिला गरियाबंद ने बताया कि रागी की खेती के लिए शुष्क जलवायु उपयुक्त होती है। भारत में इसे मुख्यतः खरीफ फसल के रूप में उगाया जाता है। इसके पौधों को अधिक वर्षा की आवश्यकता नहीं होती। यह फसल किसानों के लिए अधिक लाभकारी मानी जाती है।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |